Monday, December 31, 2012

दिवाली की रात

तुझ बिन दिवाली मैं कैसे मनाऊं,
बिछड़ कर तुझसे कैसे मैं दिल का दीप जलाऊं,
बिंदिया, चूड़ी, कंगना सब लेकर आऊं,
पहन कर उन्हें फिर मैं तुझे रिझाऊं,
अब और किस तरह से मैं तुझे मनाऊं,
अपना तन मन धन सब तुझ पर लुटाऊं,
तुझ बिन दिवाली मैं कैसे मनाऊं,
बिछड़ कर तुझसे कैसे मैं दिल का दीप जलाऊं।

Friday, December 21, 2012

'बहना रानी'

चंचल है, चालाक बहुत,
करती वोह अपनी मनमानी,
रहती हर पल साथ मेरे,
फिर भी है मुझसे अनजानी,
करती है वोह पगली हर दिन,
नई कोई एक नादानी,
मेरा ही एक रूप है वोह,
मेरी प्यारी बहना रानी।